आज का विचार

 “तप उसे कहते हैं जो मानव अपने शत्रु और मित्र को दोनों को जान सके और जानने के पश्चात मानो शत्रु और मित्र को दोनों को एक सामन्य दृष्टिपात करने का नाम तप कहा गया है।.....

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श्रृंगी-ऋषि वेद विज्ञान प्रतिष्ठान
ShringiRishi Ved Vigyan Pratishthan 

  

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New Edition वर्ष-2,अंक-8.
1.
 श्रृंगी-ऋषि ज्ञान प्रवाहिका
2. घन पाठ  
3. सामवेद (एक शौध प्रकाशन)
4. ॐ का महत्व 
5
ॐ जपने का आधार एवं विधि

संध्या, हवन-यज्ञ के लिए पुस्तक
ब्रह्म यज्ञ
देव यज्ञ
सामवेद
पूज्यपाद गुरुदेव के प्रवचनों की ई-बुक्स
इ बुक्स

Audio के लिए गुरु-वाणी 

4. अनुदान सहायता (Donations) एवं पत्रिका के लिए धन प्रेषण के लिए बैंक अकाउंट-जानकारी अनुदान सहायता  पेज पर.

श्रृंगी-ऋषि ज्ञान प्रवाहिका

Video के लिए गुरु दर्शन 
 
       

पूज्यपाद गुरुदेव श्रृंगी-ऋषि कृष्ण दत्त जी के सृष्टि के आदि काल से (आदि ब्रह्मा जी के शिष्य होने से) लेकर कलियुग अर्थात 15/10/1992 तक (पूर्व जन्म की श्रृंगी ऋषि आत्मा कृष्ण दत्त जी के जीवन काल तक) के विभिन्न कालों में जीवन रहा है| किस-किस काल में उनका कैसा दिव्य जीवन रहा है, प्रवचनों के माध्यम से इसका ज्ञान होता है|

इस काल में श्वासन की मुद्रा में स्थित होने पर उनके प्रवचन स्वत: ही प्रारंभ हो जाते थे|जो कुछ भी उन दिव्य प्रवचनों में दिव्य आत्माओं के माध्यम से कहा गया है, उससे हम स्वत:ही जुड़ जाते हैं या जुड़ने की सतत कोशिश करते हैं| यदि हम दिव्य आत्माओं के जीवन और प्रवचनों के दिव्य ज्ञान से जुड़ जाएँ, तो निश्चित ही हम अपने उस उद्देश्य से जुड़ जायेंगे जो उद्देश्य मोक्ष से लेकर मोक्ष तक की यात्रा का होता है|
श्रृंगी ऋषि वेद विज्ञान प्रतिष्ठान का उद्देश्य ही ऐसी स्थिति, परिस्थिति और परिवेश को निर्मित करना है जिससे स्वयं को उस दिव्य ऋषि के जीवन और दिव्य ज्ञान की धरोहर से जोड़ा जा सके| अत: हमारा उद्देश्य मात्र इतना ही "हम से जुड़ें।स्वयं से जुड़ें।" श्रृंगी ऋषि कृष्ण दत्त जी के जीवन और उनके प्रवचनों की अमृतवाणी से जुड़ें जिससे हम अपने जीवन के उद्देश्य से जुड़ जायेंगे.
डॉ. कृष्णावतार

shringirishi.vani@gmail.com or sukeshtyagi1@gmail.com.